कानून की इस धारा के तहत मिल सकती है सजा-ए-मौत

हेल्लो दोस्त मै अरुन बातने वाला हूँ
की कानून की किस धारा के तहत मिल सकती है सजा ए मैत हम अक्सर सुनते और पढ़ते हैं
कि हत्या के मामले में अदालत ने आईपीसी यानी भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के तहत मुजरिम को हत्या का दोषी पाया है.
ऐसे में दोषी को सज़ा-ए-मौत या फिर उम्रकैद की सजा दी जाती है.
लेकिन धारा 302 के बारे में अभी भी काफी लोग नहीं जानते.
आइए संक्षेप में जानने की कोशिश करते हैं
कि क्या है भारतीय दण्ड संहिता यानी इंडियन पैनल कोड और उसकी धारा 302
भारतीय दण्ड संहिता यानी इंडियन पैनल कोड  IPC भारत में यहां के किसी भी नागरिक द्वारा किये गये
कुछ अपराधों की परिभाषा औ दण्ड का प्राविधान करती हैलेकिन यह जम्मू एवं कश्मीर और भारत की सेना
पर लागू नहीं होती है जम्मू एवं कश्मीर में इसके स्थान पर रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती है.
भारतीय दण्ड संहिता ब्रिटिश काल मेंसन
भारतीय दण्ड संहिता ब्रिटिश काल मेंसन 1862 मै लागूहुई थी इसके बाद समय-समय पर इसमें संशोधन होते रहे
विशेषकर भारत के स्वतन्त्र होने के बाद इसमें बड़ा बदलाव किया गया पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दण्ड
संहिता को ही अपनायालगभग इसी रूप में यह विधान तत्कालीन ब्रिटिश सत्ता के अधीन आने वाले बर्मा,
श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, ब्रुनेई आदि में भी लागू कर दिया गया था.

INDIAN  दंड संहिता की धारा 302

आईपीसी की धारा 302 कई मायनों में काफी महत्वपूर्ण है क़त्ल के आरोपियों पर धारा 302.लगाई जाती है
अगर किसी पर हत्या का दोष साबित हो जाता है तो उसे उम्रकैद या फांसी की सजा और जुर्माना हो सकता है
कत्ल के मामलों में खासतौर पर कत्ल के इरादे और उसके मकसद पर ध्यान दिया जाता है इस तरह के मामलों
में पुलिस को सबूतों के साथ ये साबित करना होता है कि कत्ल आरोपी ने किया है. आरोपी के पास कत्ल का
मकसद भी था और वह कत्ल करने का इरादा भी रखता था.

किस मामलों में नहीं लगती धारा 302

हत्या के कई मामलों में इस धारा को इस्तेमाल नहीं किया जाता यह ऐसे मामले होते हैं जिनमें किसी की मौत तो होती है

पर उसमें किसी का इरादतन दोष नहीं होता ऐसे में धारा 302 की बजाय धारा 304 का प्रावधान है

इस धारा के तहत आने वाले मानव वध में भी दंड का प्रावधान है

भारतीय दंड संहिता के तहत धारा 299

भारतीय दंड संहिता के तहत धारा 299 के अलावा धारा 300 में भी हत्या के मामलों को परिभाषित किया गया है.
जिनका विवरण अदालती कार्रवाई के दौरान मिल जाता है लेकिन हत्या के मामलों में धारा 302 को सबसे अधिक
गंभीर और मजबूत मानी जाती है जिसके तहत दोषी को दंडित किया जाता है.
  दोस्तों  ऐसी ही ताज़ा न्यूज़ अपडेट के लिए जुड़े sarkaridna.com  के साथ और अधिक जानकरी के लिए
  आप हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करे


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here