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आपकी इंटरनेट प्रोफाइल मात्र 140 रूपये में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW)पर बिक रही है

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आपकी प्रोफाइल को एक सेंट्रल सर्वर पर अपलोड कर बेचा जा रहा है।

क्या आपको पता है कि वर्ल्ड वाइड वेब की ‘काली दुनिया’ में आपकी प्रोफाइल बिक्री के लिए उपलब्ध है।

खास बात है कि न सिर्फ हैकर्स और ठग बल्कि

कंपनियां और मार्केट रिसर्चर भी इस डेटा को खरीद रहे हैं।

आपकी प्रोफाइल को एक सेंट्रल सर्वर पर अपलोड कर बेचा जा रहा है।

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम है अरुन और हूँ आज की इस पोस्ट में आपको देने वाले एक ऐसी जानकारी जो आपको नही पता होगी

तो दोस्तों चलिए हम चलते है अपनी पोस्ट पर और बात करते है

की कैसे आप की इन्टरनेट प्रोफाइल  ऑनलाइन नेटवर्किंग में बेचीं जा रही और कितने पैसो में

डार्क वेब में आपकी प्रोफाइल 140 रुपये/दिन में बिक रही है

दोस्तों  क्या आपको अंदाजा भी है कि आपके इस डेटा की कीमत क्या लगी है? मात्र 140 रुपये प्रतिदिन।

जी हा दोस्तों आपकी की इन्टरनेट प्रोफाइल मात्र 140 बिक रही  है

ये प्रोफाइल न सिर्फ हैकर और क्रूक खरीद रहे हैं बल्कि कंपनी और मार्केट रिसर्चर्स भी इस डेटा को खरीद रहे हैं

यूजर्स के चोरी हुए डेटा में पासवर्ड फोन नं. व ईमेल शामिल है

डार्क वेब’ नाम की यह दुनिया रेगुलर ब्राउजर्स के जरिए ऐक्सेस नहीं की सकती।

सिर्फ टॉर जैसे ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर जो कि अनजान कम्युनिकेशन की अनुमति देते हैं

उनके जरिए ही डार्क वेब को ऐक्सेस किया जा सकता है।

इंटरनेट के इस छिपे हुए हिस्से में, हैकर्स इंटरनेट यूजर की जानकारी मुहैया करा रहे हैं।

इनमें पासवर्ड, टेलिफोन नंबर और ईमेल आईडी जैसी जानकारियां शामिल हैं।

बता दें कि इन डेटा की तलाश साइबरअटैक वाले लोग करते हैं तो वहीं वो लोग भी जिन्हें मुफ्त में वीडियो स्ट्रिमिंग

सर्विस की तलाश होती है. इस दौरान नॉर्मल यूजर्स इन चीजों के पैसे देते हैं तो वहीं ये उन चीजों को एक तरह से हैक

कर इसका इस्तेमाल करते हैं

हाईप्रोफाइल सिलेब्रिटी जैसे राजनेताओं या बॉलिवुड स्टार के डेटा के है अलग दाम

साइबरसिक्यॉरिटी एक्सपर्ट गौतम कुमावत कहते हैं, ‘रेगुलर यूजर का पासवर्ड आमतौर पर 1 रुपये में ही मिल जाता

है लेकिन हाईप्रोफाइल सिलेब्रिटी जैसे राजनेताओं या बॉलिवुड स्टार के डेटा को 500-2,000 रुपये में बेचा जाता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि डेटा चोरी के खिलाफ कड़े कानून से ही इस पर रोक लगाई जा सकती है।

सिंगल पासवर्ड इस्तेमाल करना है सबसे बड़ी कमजोरी

बता दें कि हैकर्स का एक ग्रुप जहां डेटा को लीक करता है तो वहीं दूसरा इसे सुरक्षित करता है और तीसरा ग्रुप इसे इकट्ठा कर सेंट्रल सर्वर में भेजता है

जहां से सभी डेटा लीक होते हैं. यहां हैकर्स आसानी से किसी का भी डेटा चुरा सकते हैं

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